जरूरी
बदलाव: सरकार ने तय किए नए एयरफेयर, यात्रियों को मिली बड़ी
राहत
भारत में हवाई यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर है। हाल के दिनों में इंडिगो एयरलाइंस में पायलटों की कमी के चलते हजारों फ्लाइट के कैंसिल होने के बाद, सरकार ने तय किए नए एयरफेयर यानी हवाई किराया सीमाएं (Fare Caps) लागू करने का एक बड़ा फैसला लिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने यह कदम यात्रियों को मनमाने ढंग से बढ़ाए गए किराए से बचाने और बाजार में स्थिरता लाने के लिए उठाया है। यह फैसला उस समय आया है जब हजारों यात्री फ्लाइट कैंसिलेशन की वजह से परेशान थे और दूसरी एयरलाइन्स के टिकटों की कीमतें आसमान छू रही थीं। इस नए एयरफेयर सिस्टम का मकसद है कि कोई भी एयरलाइन एक निश्चित सीमा से ज्यादा का किराया वसूल न सके, चाहे मांग कितनी भी ज्यादा क्यों न हो। यह नियम सभी घरेलू एयरलाइन्स पर लागू होगा और इससे न केवल मौजूदा संकट में यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में भी ऐसी स्थिति से बचा जा सकेगा।
इस नई नीति के तहत, फ्लाइट के रूट की दूरी के
आधार पर टिकट की अधिकतम कीमत तय की गई है। मोटे तौर पर, सरकार ने तय किए नए एयरफेयर चार अलग-अलग स्लैब में
बांटे गए हैं। पहले स्लैब में 40 मिनट से कम की उड़ानें आती हैं, जिनके टिकट की अधिकतम कीमत 7,500 रुपये रखी गई है। दूसरे
स्लैब में 40 मिनट
से 60 मिनट
के बीच की फ्लाइट्स शामिल हैं, जिनका अधिकतम किराया 12,000 रुपये तय किया गया है। तीसरा
स्लैब 60 मिनट
से 90 मिनट
की उड़ानों का है, जहां
अधिकतम कीमत 15,000 रुपये
है। और आखिरी स्लैब 90 मिनट
से 120 मिनट
यानी दो घंटे तक की फ्लाइट्स के लिए है, जहां टिकट की कीमत 18,000 रुपये से ज्यादा नहीं हो
सकती। यह साफ है कि सरकार
ने तय किए नए एयरफेयर यात्रियों
की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, खासकर तब जब अचानक किसी
एयरलाइन की परेशानी से दूसरी कंपनियां फायदा उठाकर कीमतें बढ़ा देती थीं।
संकट
की वजह और सरकार का तत्काल जवाब
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ
जब इंडिगो एयरलाइन्स, जो
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है, को अपने बेड़े के एक हिस्से को ग्राउंड
करना पड़ा क्योंकि बहुत से पायलट्स ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) नियमों का हवाला देते हुए
अचानक छुट्टी ले ली। इसकी वजह से एयरलाइन को एक दिन में सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसिल
करनी पड़ीं, जिससे
देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स जैसे दिल्ली और मुंबई में भारी भीड़ और यात्रियों की
बड़ी परेशानी हुई। इस अराजकता का फायदा उठाते हुए, दूसरी एयरलाइन्स ने अपने
टिकटों की कीमतें बेतहाशा बढ़ा दीं। कुछ रूट्स पर तो टिकट की कीमत सामान्य से पांच
गुना ज्यादा तक पहुंच गई थी। यही वह पल था जब नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA को हस्तक्षेप करना पड़ा।
उन्होंने न सिर्फ इंडिगो से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा, बल्कि यात्रियों के हित में
यह ऐतिहासिक फैसला लेते हुए नए एयरफेयर लागू किए। इस कदम से यह
संदेश गया है कि सरकार बाजार में मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस पूरे संकट और सरकार द्वारा तय किए गए नए
एयरफेयर का
असर अब दिखने लगा है। टिकट बुकिंग करने वाली वेबसाइट्स पर अब कीमतें नियंत्रण में
नजर आ रही हैं। यात्रियों को अब यह डर नहीं सता रहा है कि अचानक कोई फ्लाइट कैंसिल
हो गई तो वैकल्पिक टिकट खरीदना उनके बजट से बाहर हो जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि
यह एक अस्थायी उपाय है। दीर्घकाल में, एयरलाइन्स को अपने संसाधनों, खासकर पायलट्स और क्रू की
तैनाती, का
बेहतर प्रबंधन करना होगा। साथ ही, FDTL जैसे नियमों की स्पष्ट व्याख्या और
पालन सुनिश्चित करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी अचानक आई समस्या से बचा जा सके।
फिलहाल, सरकार
के इन नए एयरफेयर ने
यात्रियों को एक सुरक्षा कवच तो दे दिया है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि
नागरिक उड्डयन मंत्रालय का यह फैसला एक सकारात्मक और जरूरी कदम है। इसने न केवल एक
तत्कालीन संकट को नियंत्रित करने में मदद की है, बल्कि यह भी तय किया है कि
भविष्य में ऐसी स्थितियों में यात्री शोषण का शिकार न बनें। सरकार ने तय किए नए एयरफेयर यह सुनिश्चित करेंगे कि
हवाई यात्रा एक आम आदमी की पहुंच में रहे और देश की कनेक्टिविटी बनी रहे।
यात्रियों के लिए यह सलाह है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन नए फेयर
कैप्स को ध्यान में रखें और किसी भी तरह की मनमानी की कीमत चुकाने से बचें। यह
फैसला वास्तव में 'यात्री
प्रथम' की
नीति को आगे बढ़ाता हुआ एक स्वागतयोग्य कदम है।

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